❤️श्री राधे श्याम❤️

 
❤️श्री राधे श्याम❤️
ऐसैं हिय में बसत रहौ, नव-किसोर रस-रासि । चितवनि अति अनुराग की, करत मंद मृदु हाँसि ।। करत मंद मृदु हाँसि दोउ, होत जु प्रेम प्रकास । छके रहत मदमत्त गति, आनँद मदन विलास ।। 'हित ध्रुव' छबि सौं कुंज में, दै अंसनि-भुज वैसे । मेरी मति इति नाहिं, कहौं उपमा दै ऐसे ।। - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलिया (11) श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि वह छवि मेरे ह्रदय में नित्य प्रतिबिंबित रहे, जब रसनिधि नवल किशोर हास-परिहास परायण होते हैं, उस समय कि उनकी चितवन सरस अनुराग-भीनी होती है । उनके उस मधुर हास्य विनोद में भी हार्दिक प्रीति का प्रकाश होता है । प्रेम-छके ये किशोर नव-दंपति अनंग-क्रीड़ा के विविध विलासों में प्रेमोन्मत्त बने रहते हैं एवं निभृत-निकुंज-स्थल में भुजाओं को परस्पर स्कन्धों पर न्यस्त किये हुए प्रेम-छके ये मिथुन किशोर नित्य-नवीन शोभा से युक्त होते हैं । उस समय उनकी अनुपम शोभा की उपमा देने के लिए मेरी मति सर्वथा असमर्थ है । “Aisain Hiy Mein Basat Rahau, Nav-Kisor Ras-Rasi. Chitvani Ati Anurag Ki, Karat Mand Mridu Hansi..” Shri Dhruvdas says, The blissful glimpses of the Divine couple always resides in my heart where they are seen Joking and talking with each other. “Karat Mand Mridu Hansi Dou, Hot Ju Prem Prakas. Chhake Rahat Mad-Matt Gati, Anand Madan Vilas..” Their beautiful and sweet smile is the source of love for the Rasiks. Their swaying gait resembles with an intoxicated elephant's walk, they are overly delighted with the sweet nectar of each other's beauty and love. “ 'Hit Dhruv' Chhabi Saun Kunj Mein, Dai Ansani-Bhuj Vaise. Meri Mati Iti Nahin, Kahaun Upma Dai Aise..” Putting Their arms around each other, overjoyed with love, the Divine couple is seen in The Kunjas of Vrindavan Dham. Shri Dhruvdas says, "Their blissful love and glimpses at that moment, is impossible to describe and is out of reach of my mind and intellect." - Shri Dhruvdas, Bayalis Leela, Bhajan Kundaliya (11)
Etiquetas:
 
shwetashweta
cargado por: shwetashweta

Califica esta imagen:

  • Actualmente 5.0/5 estrellas.
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5

2 Votos.